हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.74.5

मंडल 1 → सूक्त 74 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 74
तमित्सु॑ह॒व्यम॑ङ्गिरः सुदे॒वं स॑हसो यहो । जना॑ आहुः सुब॒र्हिष॑म् ॥ (५)
हे बलपुत्र अग्नि! उसी यजमान को सब लोग शोभन हविसंपन्न, सुंदर देवों वाला एवं उत्तम यज्ञयुक्त कहते हैं. (५)
O son of strength, agni! The same host is called by all the people as Shobhan Havisampanna, the one with beautiful gods and the best yajnayukta. (5)