हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.75.4

मंडल 1 → सूक्त 75 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 75
त्वं जा॒मिर्जना॑ना॒मग्ने॑ मि॒त्रो अ॑सि प्रि॒यः । सखा॒ सखि॑भ्य॒ ईड्यः॑ ॥ (४)
हे अग्नि! तुम सबके बंधु एवं प्रिय मित्र हो. तुम मित्रों के स्तुति योग्य मित्र हो. (४)
O agni! You are all brothers and dear friends. You are a friend worthy of praise to friends. (4)