हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.78.2

मंडल 1 → सूक्त 78 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 78
तमु॑ त्वा॒ गोत॑मो गि॒रा रा॒यस्का॑मो दुवस्यति । द्यु॒म्नैर॒भि प्र णो॑नुमः ॥ (२)
धन की इच्छा वाले गौतम ऋषि जिस अग्नि की स्तोत्र द्वारा सेवा करते हैं, हम भी गुणप्रकाशक स्तोत्र द्वारा उसी अग्नि की बार-बार स्तुति करते हैं. (२)
Gautam Rishi, who is desirous of wealth, serves the Agni by the stotra, we also praise the same agni again and again with the quality hymns. (2)