हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.80.5

मंडल 1 → सूक्त 80 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 80
इन्द्रो॑ वृ॒त्रस्य॒ दोध॑तः॒ सानुं॒ वज्रे॑ण हीळि॒तः । अ॒भि॒क्रम्याव॑ जिघ्नते॒ऽपः सर्मा॑य चो॒दय॒न्नर्च॒न्ननु॑ स्व॒राज्य॑म् ॥ (५)
क्रोध में भरे इंद्र वृत्र असुर के सामने जाकर उसे कंपाते हैं, उसकी उठी हुई ठोड़ी पर वज्र का प्रहार करते हैं एवं अपने अधिकार का प्रदर्शन करते हुए वर्षा के जल को बहाते हैं. (५)
The angry Indra Vrithra goes in front of the asura and shakes him, strikes his raised chin with a thunderbolt and shows his authority and pours out the rain water. (5)