हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.83.4

मंडल 1 → सूक्त 83 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 83
आदङ्गि॑राः प्रथ॒मं द॑धिरे॒ वय॑ इ॒द्धाग्न॑यः॒ शम्या॒ ये सु॑कृ॒त्यया॑ । सर्वं॑ प॒णेः सम॑विन्दन्त॒ भोज॑न॒मश्वा॑वन्तं॒ गोम॑न्त॒मा प॒शुं नरः॑ ॥ (४)
पहले पणियों द्वारा गाएं चुराने पर अंगिरा ऋषि ने इंद्र के लिए हवि प्रस्तुत किया था. इस कारण यज्ञ नेता अंगिरावंशियों ने गाय, अश्व एवं अन्य पशुओं से युक्त धन पाया था. (४)
Sage Angira had earlier presented havi for Indra when the cows were stolen by the pangs. Due to this, the yajna leader Angiravanshis had received wealth containing cows, horses and other animals. (4)