हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.84.12

मंडल 1 → सूक्त 84 → श्लोक 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 84
ता अ॑स्य॒ नम॑सा॒ सहः॑ सप॒र्यन्ति॒ प्रचे॑तसः । व्र॒तान्य॑स्य सश्चिरे पु॒रूणि॑ पू॒र्वचि॑त्तये॒ वस्वी॒रनु॑ स्व॒राज्य॑म् ॥ (१२)
प्रकृष्ट ज्ञान युक्त ये गाएं अपना दूध पिलाकर इंद्र की शक्ति बढ़ाती हैं. ये शत्रुओं की जानकारी के लिए इंद्र के शत्रु-विनाश आदि कर्म पहले ही बता देती हैं. इस प्रकार ये इंद्र का अधिकार प्रदर्शित करती हैं. (१२)
These cows with a great knowledge increase the power of Indra by feeding their milk. They already tell indra's enemy-destruction, etc., deeds for the knowledge of enemies. Thus they demonstrate indra's authority. (12)