हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.84.6

मंडल 1 → सूक्त 84 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 84
नकि॒ष्ट्वद्र॒थीत॑रो॒ हरी॒ यदि॑न्द्र॒ यच्छ॑से । नकि॒ष्ट्वानु॑ म॒ज्मना॒ नकिः॒ स्वश्व॑ आनशे ॥ (६)
हे इंद्र! जब तुम अपने हरि नामक अश्चों को रथ में जोड़ देते हो, उस समय तुमसे श्रेष्ठ रथी कोई नहीं होता. तुम्हारे समान बली एवं सुंदर अश्चों का स्वामी भी कोई नहीं है. (६)
O Indra! When you add your asshas called Hari to the chariot, there is no one better than you. There is no one like you who is the master of the beautiful and beautiful asses. (6)