हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.86.3

मंडल 1 → सूक्त 86 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 86
उ॒त वा॒ यस्य॑ वा॒जिनोऽनु॒ विप्र॒मत॑क्षत । स गन्ता॒ गोम॑ति व्र॒जे ॥ (३)
जिस यजमान का हव्य वहन करने के लिए ऋत्विज्‌ मरुद्गण को तीक्ष्ण करते हैं, वह अनेक गायों वाले गोठ में जाता है. (३)
The host whose havity the sages sharpen the desert to bear goes to the goth containing many cows. (3)