हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.89.2

मंडल 1 → सूक्त 89 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 89
दे॒वानां॑ भ॒द्रा सु॑म॒तिरृ॑जूय॒तां दे॒वानां॑ रा॒तिर॒भि नो॒ नि व॑र्तताम् । दे॒वानां॑ स॒ख्यमुप॑ सेदिमा व॒यं दे॒वा न॒ आयुः॒ प्र ति॑रन्तु जी॒वसे॑ ॥ (२)
अपने यजमानों से प्रेम करने वाले देवों का कल्याणकारक अनुग्रह एवं दान हमें प्राप्त हो. हम उनकी मित्रता प्राप्त करें, वे हमारी आयु में वृद्धि करें. (२)
May we receive the welfare grace and charity of the gods who love their hosts. Let us get their friendship, they increase our age. (2)