हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.89.6

मंडल 1 → सूक्त 89 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 89
स्व॒स्ति न॒ इन्द्रो॑ वृ॒द्धश्र॑वाः स्व॒स्ति नः॑ पू॒षा वि॒श्ववे॑दाः । स्व॒स्ति न॒स्तार्क्ष्यो॒ अरि॑ष्टनेमिः स्व॒स्ति नो॒ बृह॒स्पति॑र्दधातु ॥ (६)
अगणित स्तुतियों के योग्य और सर्वज्ञ पूषा हमारा कल्याण करें. जिनके रथ के पहियों को कोई हानि नहीं पहुंचा सकता है, ऐसे गरुड़ एवं बृहस्पति हमारा कल्याण करें. (६)
May the worthy and omniscient worship of countless praises do us good. Those whose wheels of the chariot can not be harmed by anyone, such garudas and jupiters may do us well. (6)