हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.91.13

मंडल 1 → सूक्त 91 → श्लोक 13 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 91
सोम॑ रार॒न्धि नो॑ हृ॒दि गावो॒ न यव॑से॒ष्वा । मर्य॑ इव॒ स्व ओ॒क्ये॑ ॥ (१३)
हे सोम! जिस प्रकार गाएं सुंदर घास से एवं मनुष्य अपने घर में रहने से प्रसन्न होते हैं, उसी प्रकार तुम हमारे द्वारा दिए गए हव्य से तृप्त होकर हमारे हृदय में निवास करो. (१३)
Hey Mon! Just as sing with the beautiful grass and men are pleased to live in their house, so be satisfied with the promise we have given us and dwell in our hearts. (13)