हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.92.9

मंडल 1 → सूक्त 92 → श्लोक 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 92
विश्वा॑नि दे॒वी भुव॑नाभि॒चक्ष्या॑ प्रती॒ची चक्षु॑रुर्वि॒या वि भा॑ति । विश्वं॑ जी॒वं च॒रसे॑ बो॒धय॑न्ती॒ विश्व॑स्य॒ वाच॑मविदन्मना॒योः ॥ (९)
चमकती हुई उषाएं समस्त प्राणियों को प्रकाशित करने के पश्चात्‌ पश्चिम दिशा में अपने तेज से विस्तृत होती हुई उद्दीप्त हो रही हैं. वे समस्त जीवों को अपने-अपने काम में प्रवृत्त होने के लिए जगाती हैं एवं भाषणकुशल लोगों की बातें सुनती हैं. (९)
The shining ushas are getting excited in the west direction after illuminating all beings with their brightness. They awaken all living beings to be inclined in their respective work and listen to the speech-efficient people. (9)