हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.95.11

मंडल 1 → सूक्त 95 → श्लोक 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 95
ए॒वा नो॑ अग्ने स॒मिधा॑ वृधा॒नो रे॒वत्पा॑वक॒ श्रव॑से॒ वि भा॑हि । तन्नो॑ मि॒त्रो वरु॑णो मामहन्ता॒मदि॑तिः॒ सिन्धुः॑ पृथि॒वी उ॒त द्यौः ॥ (११)
हे शोधक अग्नि! समिधाओं के कारण प्रज्वलित होकर हमें धनयुक्त अन्न देने के लिए विशेष रूप से चमको. मित्र, वरुण, अदिति, सिंधु, धरती और आकाश उस अन्न की पूजा करें. (११)
O seeker agni! Shine especially to give us rich food by igniting because of the samidahas. Friends, Varuna, Aditi, Sindhu, Earth and Sky should worship that food. (11)