ऋग्वेद (मंडल 10)
को अ॒स्य वे॑द प्रथ॒मस्याह्नः॒ क ईं॑ ददर्श॒ क इ॒ह प्र वो॑चत् । बृ॒हन्मि॒त्रस्य॒ वरु॑णस्य॒ धाम॒ कदु॑ ब्रव आहनो॒ वीच्या॒ नॄन् ॥ (६)
यमी बोली- पहले दिन के संभोग को कौन जानता है! उसे किसने देखा है? उसे कौन बताएगा? हे मोक्ष और बंधन का निर्णय करने वाले यम! तुम मित्र और वरुण के स्थान अर्थात् दिन-रात के विषय में क्या कहते हो. (६)
Yami quote- Who knows the first day's orgasm! Who has seen him? Who will tell him? O Yama who decides salvation and bondage! What do you say about the place of friend and Varuna i.e. day and night? (6)