हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.100.9

मंडल 10 → सूक्त 100 → श्लोक 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 100
ऊ॒र्ध्वो ग्रावा॑ वसवोऽस्तु सो॒तरि॒ विश्वा॒ द्वेषां॑सि सनु॒तर्यु॑योत । स नो॑ दे॒वः स॑वि॒ता पा॒युरीड्य॒ आ स॒र्वता॑ति॒मदि॑तिं वृणीमहे ॥ (९)
हे देवो! मुझ सोमरस निचोड़ने वाले का पत्थर ऊंचा हो. तुम उसी पत्थर से सब छिपे हुए शत्रुओं को हमसे अलग करो. वे सविता देव हमारे पालक एवं प्रशंसनीय हैं. मैं सबकी रक्षा करने वाली देवमाता अदिति का वरण करता हूं. (९)
O God! Let the stone of my somerus squeezer be high. You separate all the hidden enemies from us with the same stone. She Savita Dev is our foster and admirable. I choose Devmata Aditi, who protects everyone. (9)