ऋग्वेद (मंडल 10)
वंस॑गेव पूष॒र्या॑ शि॒म्बाता॑ मि॒त्रेव॑ ऋ॒ता श॒तरा॒ शात॑पन्ता । वाजे॑वो॒च्चा वय॑सा घर्म्ये॒ष्ठा मेषे॑वे॒षा स॑प॒र्या॒३॒॑ पुरी॑षा ॥ (५)
हे अश्चिनीकुमारो! तुम बैलों के समान स्वस्थ एवं सुखदाता तथा मित्र वरुण के समान यथार्थ-दर्शी, सैकड़ों सुख देने एवं शीघ्र स्तुति पाने वाले हो. तुम घोड़ों के समान हव्य से पुष्ट एवं सूर्यचंद्रमा के रूप में स्थित हो और मेढ़ों के समान भोज्य पदार्थ से पुष्ट अंग वाले बने हो. (५)
O aschinikumaro! You are as healthy and pleasant as bulls and as realistic as friend Varuna, giving hundreds of pleasures and getting quick praise. You are as strong as horses and located as a sun moon, and you are made of a fleshy substance like rams. (5)