हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.111.6

मंडल 10 → सूक्त 111 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 111
वज्रे॑ण॒ हि वृ॑त्र॒हा वृ॒त्रमस्त॒रदे॑वस्य॒ शूशु॑वानस्य मा॒याः । वि धृ॑ष्णो॒ अत्र॑ धृष॒ता ज॑घ॒न्थाथा॑भवो मघवन्बा॒ह्वो॑जाः ॥ (६)
हे इंद्र! तुमने वज्र से वृत्र को मारा. यज्ञविरोधी कार्य करने वाले वृत्र की सारी मायाओं को भयानक वज्ज से समाप्त किया. हे धनस्वामी इंद्र! इसके बाद तुम अधिक शक्तिशाली बने. (६)
O Indra! You hit the vritra with a thunderbolt. All the maya of Vrithra, who performed the anti-yajna work, ended with a terrible waza. O Dhanaswami Indra! After that you became more powerful. (6)