ऋग्वेद (मंडल 10)
चि॒त्र इच्छिशो॒स्तरु॑णस्य व॒क्षथो॒ न यो मा॒तरा॑व॒प्येति॒ धात॑वे । अ॒नू॒धा यदि॒ जीज॑न॒दधा॑ च॒ नु व॒वक्ष॑ स॒द्यो महि॑ दू॒त्यं१॒॑ चर॑न् ॥ (१)
नवीन शिशुरूपी अग्नि का हव्य वहन अत्यंत विचित्र है. यह बालक दूध पीने के लिए अपने माता-पिता के पास नहीं जाता. माता-पिता ने स्तन न होते हुए भी बालक को जन्म दिया है. यह बालक जन्म लेने के बाद ही महान् दूतकर्म का निर्वाह करता है. (१)
The new infantry agni is very strange. This child does not go to his parents to drink milk. Parents have given birth to a child despite not having breasts. This child performs great messengers only after being born. (1)
ऋग्वेद (मंडल 10)
अ॒ग्निर्ह॒ नाम॑ धायि॒ दन्न॒पस्त॑मः॒ सं यो वना॑ यु॒वते॒ भस्म॑ना द॒ता । अ॒भि॒प्र॒मुरा॑ जु॒ह्वा॑ स्वध्व॒र इ॒नो न प्रोथ॑मानो॒ यव॑से॒ वृषा॑ ॥ (२)
अनेक यज्ञकार्यं करने वाले एवं दाता अग्नि को धारण किया गया है. यह प्रकाशरूपी दांतों से वनों का भक्षण करते हैं. जुहू नामक ऊंचे पात्र में यज्ञ का भाग प्राप्त करने वाले इंद्र इस प्रकार हव्यभक्षण करते हैं, जिस प्रकार शक्तिशाली बैल घास खाता है. (२)
Many yajna works and donor agni has been worn. They feed forests with light-like teeth. Indra, who receives the part of the yajna in a high vessel called Juhu, meditates in such a way that the powerful bull eats grass. (2)
ऋग्वेद (मंडल 10)
तं वो॒ विं न द्रु॒षदं॑ दे॒वमन्ध॑स॒ इन्दुं॒ प्रोथ॑न्तं प्र॒वप॑न्तमर्ण॒वम् । आ॒सा वह्निं॒ न शो॒चिषा॑ विर॒प्शिनं॒ महि॑व्रतं॒ न स॒रज॑न्त॒मध्व॑नः ॥ (३)
पक्षी के समान वृक्षनिर्मित अरणि का आश्रय लेने वाले, अन्न देने वाले, दीप्तिशाली, शब्दकर्त्ता, वनों के अत्यधिक दाहक, अतिशय हव्यवाहक, बैल के समान हव्य-वहन करने वाले अपने प्रकाश से महान् व सूर्य के समान मार्ग का निर्माण करने वाले अग्नि की स्तुति करो. (३)
Praise the agni that takes shelter of a tree-like forest like a bird, the giver of food, the radiant, the word-maker, the most burning of the forests, the very lustful, the bull-like energy, who creates the path like the great sun with its light. (3)
ऋग्वेद (मंडल 10)
वि यस्य॑ ते ज्रयसा॒नस्या॑जर॒ धक्षो॒र्न वाताः॒ परि॒ सन्त्यच्यु॑ताः । आ र॒ण्वासो॒ युयु॑धयो॒ न स॑त्व॒नं त्रि॒तं न॑शन्त॒ प्र शि॒षन्त॑ इ॒ष्टये॑ ॥ (४)
जरारहित, गमनशील व वनों के जलाने के इच्छुक अग्नि का स्थिर प्रभाव वायु के समान सब ओर वर्तमान रहता है. योद्धाओं के समान शब्द करते हुए पुरोहित यज्ञ के लिए अग्नि को घेरते हैं. उस समय तुम तीन मूर्तियां धारण करके शक्ति का प्रदर्शन करते हो. (४)
The steady effect of agni, which is jarless, moving and willing to burn forests, is present everywhere like air. Saying words similar to warriors, priests surround the agni for the yagna. At that time you display power by wearing three idols. (4)
ऋग्वेद (मंडल 10)
स इद॒ग्निः कण्व॑तमः॒ कण्व॑सखा॒र्यः पर॒स्यान्त॑रस्य॒ तरु॑षः । अ॒ग्निः पा॑तु गृण॒तो अ॒ग्निः सू॒रीन॒ग्निर्द॑दातु॒ तेषा॒मवो॑ नः ॥ (५)
सबसे अधिक शब्द करने वाले शब्दयुक्त स्तोत्र करने वालों के मित्र स्वामी व समीपवर्ती शत्रुओं का नाश करने वाले अग्नि स्तोताओं का पालन करें. वे हमें और विद्वानों को आश्रय देते हैं. (५)
Follow the friend masters of those who do the most worded hymns and the agni hymns who destroy the nearest enemies. They give shelter to us and scholars. (5)
ऋग्वेद (मंडल 10)
वा॒जिन्त॑माय॒ सह्य॑से सुपित्र्य तृ॒षु च्यवा॑नो॒ अनु॑ जा॒तवे॑दसे । अ॒नु॒द्रे चि॒द्यो धृ॑ष॒ता वरं॑ स॒ते म॒हिन्त॑माय॒ धन्व॒नेद॑विष्य॒ते ॥ (६)
हे शोभन पिता वाले, अतिशय अन्नदाता, शत्रुपराभवकारी एवं जातवेद अग्नि! मैं तुम्हारी स्तुति के लिए शीघ्र तत्पर हूं. मैं शत्रुओं द्वारा विपत्ति खड़ी होने पर शत्रुनाश में समर्थ अपने धनुष द्वारा ही रक्षा करने वाले होनहार एवं पूज्यतम अग्नि को हव्य देता हूं. (६)
O Shobhan father, a great food provider, an enemy-builder and a jataveda agni! I look forward to praising you soon. I give strength to the promising and revered agni that protects you with my bow capable of destroying enemies when adversity arises by the enemies. (6)
ऋग्वेद (मंडल 10)
ए॒वाग्निर्मर्तैः॑ स॒ह सू॒रिभि॒र्वसुः॑ ष्टवे॒ सह॑सः सू॒नरो॒ नृभिः॑ । मि॒त्रासो॒ न ये सुधि॑ता ऋता॒यवो॒ द्यावो॒ न द्यु॒म्नैर॒भि सन्ति॒ मानु॑षान् ॥ (७)
शक्ति के पुत्र अग्नि धन पाने के लिए यज्ञकर्म के नेता मनुष्यों एवं विद्वानों द्वारा प्रशंसित होते हैं. मित्रों के समान तृप्त एवं यज्ञ की कामना करने वाले विद्वान् तेजस्वी के समान अपने बलों से शत्रुओं को हराते हैं. (७)
The leaders of yajnakarma are admired by humans and scholars to get agni wealth, the son of shakti. Scholars who are satisfied like friends and wish for yajna defeat enemies with their forces like Tejaswi. (7)
ऋग्वेद (मंडल 10)
ऊर्जो॑ नपात्सहसाव॒न्निति॑ त्वोपस्तु॒तस्य॑ वन्दते॒ वृषा॒ वाक् । त्वां स्तो॑षाम॒ त्वया॑ सु॒वीरा॒ द्राघी॑य॒ आयुः॑ प्रत॒रं दधा॑नाः ॥ (८)
हे बल के पुत्र एवं शक्तिशाली अग्नि! मुझ उपस्तुत ऋषि की हव्य बरसाने वाली स्तुति तुम्हारी वंदना करती है. हम तुम्हारी स्तुति करें एवं तुम्हारी कृपा से हमारी शोभन संतान लंबी आयु पावें. (८)
O son of strength and mighty agni! The praise of the sage who showers the hymns of me worships you. May we praise you and by your grace may our beautiful children get a long life. (8)