हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.117.7

मंडल 10 → सूक्त 117 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 117
कृ॒षन्नित्फाल॒ आशि॑तं कृणोति॒ यन्नध्वा॑न॒मप॑ वृङ्क्ते च॒रित्रैः॑ । वद॑न्ब्र॒ह्माव॑दतो॒ वनी॑यान्पृ॒णन्ना॒पिरपृ॑णन्तम॒भि ष्या॑त् ॥ (७)
हल खेती का काम करता हुआ अन्य उत्पन्न करता है. वह मार्गों पर चलता हुआ अपने कार्यो से अन्न उत्पन्न करता है. जिस प्रकार मंत्र बोलने वाला मंत्र न बोलने वाले से श्रेष्ठ है, उसी प्रकार दान देने वाला दान न देने वाले से उत्तम है. (७)
Plough produces other farming work. He produces food from His works by walking on the paths. Just as the one who speaks the mantra is superior to the one who does not speak the mantra, so the one who gives the donation is better than the one who does not give the giver. (7)