हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.118.1

मंडल 10 → सूक्त 118 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 118
अग्ने॒ हंसि॒ न्य१॒॑त्रिणं॒ दीद्य॒न्मर्त्ये॒ष्वा । स्वे क्षये॑ शुचिव्रत ॥ (१)
हे पवित्र व्रत वाले अग्नि! तुम मनुष्यों के मध्य अपने स्थान पर प्रज्वलित होकर शत्रुओं का नाश करो. (१)
O divine pledge agni! You must destroy the enemies by igniting in your place among men. (1)