हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.122.7

मंडल 10 → सूक्त 122 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 122
त्वामिद॒स्या उ॒षसो॒ व्यु॑ष्टिषु दू॒तं कृ॑ण्वा॒ना अ॑यजन्त॒ मानु॑षाः । त्वां दे॒वा म॑ह॒याय्या॑य वावृधु॒राज्य॑मग्ने निमृ॒जन्तो॑ अध्व॒रे ॥ (७)
मनुष्य प्रातःकाल होते ही तुम्हें दूत बनाकर यज्ञ करते हैं. हे अग्नि! देवगण यज्ञ में तुम्हें घृत के द्वारा प्रज्वलित करके पूजा के लिए बढ़ाते हैं. (७)
As soon as human beings are in the morning, they make you messengers and perform yajna. O agni! In the Devgan Yagya, you are ignited by ghrita and increase you for worship. (7)