हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.128.9

मंडल 10 → सूक्त 128 → श्लोक 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 128
ये नः॑ स॒पत्ना॒ अप॒ ते भ॑वन्त्विन्द्रा॒ग्निभ्या॒मव॑ बाधामहे॒ तान् । वस॑वो रु॒द्रा आ॑दि॒त्या उ॑परि॒स्पृशं॑ मो॒ग्रं चेत्ता॑रमधिरा॒जम॑क्रन् ॥ (९)
जो हमारे शत्रु हैं, वे दूर चले जावें. हम इंद्र और अग्नि की सहायता से उन्हें बाधा पहुंचावें. वसु, रुद्र और आदित्य मुझे सर्वश्रेष्ठ उन्नत शक्ति वाला चेतनायुक्त सर्वज्ञ एवं सबका स्वामी बनावे. (९)
Those who are our enemies should go away. Let us hinder them with the help of Indra and Agni. Vasu, Rudra and Aditya make me the most conscious, omniscient and master of all with the best advanced power. (9)