हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.13.2

मंडल 10 → सूक्त 13 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 13
य॒मे इ॑व॒ यत॑माने॒ यदैतं॒ प्र वां॑ भर॒न्मानु॑षा देव॒यन्तः॑ । आ सी॑दतं॒ स्वमु॑ लो॒कं विदा॑ने स्वास॒स्थे भ॑वत॒मिन्द॑वे नः ॥ (२)
हे गाडियो! जब तुम जुड़वां संतान के समान एक साथ जाती हो, तब देवपूजक लोग तुम्हारे ऊपर बहुत सी हवन की सामग्री लादते हैं. तुम अपने स्थान को जानती हुई वहां रहो एवं हमारे सोम के लिए शोभन स्थान वाली बनो. (२)
Hey, Gadiyo! When you go together like twins, the god-worshipers load a lot of havan materials on you. You know your place and stay there and be the place to be a beautiful place for our Mon. (2)