हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.131.4

मंडल 10 → सूक्त 131 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 131
यु॒वं सु॒राम॑मश्विना॒ नमु॑चावासु॒रे सचा॑ । वि॒पि॒पा॒ना शु॑भस्पती॒ इन्द्रं॒ कर्म॑स्वावतम् ॥ (४)
हे उदक के स्वामी आश्चिनीकुमारो! तुमने नमुचि असुर के साथ इंद्र के युद्ध के अवसर पर सोमरस पीकर इंद्र के कार्य में सहायता दी थी. (४)
O Lord ashinikumaro of Udak! You assisted Indra in indra's work by drinking somras on the occasion of indra's war with namuchi asura. (4)