हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.134.2

मंडल 10 → सूक्त 134 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 134
अव॑ स्म दुर्हणाय॒तो मर्त॑स्य तनुहि स्थि॒रम् । अ॒ध॒स्प॒दं तमीं॑ कृधि॒ यो अ॒स्माँ आ॒दिदे॑शति दे॒वी जनि॑त्र्यजीजनद्भ॒द्रा जनि॑त्र्यजीजनत् ॥ (२)
हे इंद्र! जो व्यक्ति हमारा हनन करना चाहता है, उसके स्थिर बल को भी तुम क्षीण करो. जो हमारा नाश करना चाहता है, उसे तुम अपने पैरों से कुचल दो. दिव्य गुण वाली एवं कल्याणमयी माता ने तुम्हें जन्म दिया है. (२)
O Indra! You also weaken the steady force of the one who wants to abuse us. "He who wants to destroy us, crush him with your feet." The divinely virtuous and well-being mother has given birth to you. (2)