हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.134.5

मंडल 10 → सूक्त 134 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 134
अव॒ स्वेदा॑ इवा॒भितो॒ विष्व॑क्पतन्तु दि॒द्यवः॑ । दूर्वा॑या इव॒ तन्त॑वो॒ व्य१॒॑स्मदे॑तु दुर्म॒तिर्दे॒वी जनि॑त्र्यजीजनद्भ॒द्रा जनि॑त्र्यजीजनत् ॥ (५)
इंद्र के दीप्तिशाली आयुध पसीने की बूंदों के समान चारों ओर गिरें. वे दूध के तंतुओं के समान फैलें और दुर्बुद्धि हमसे दूर जावें. दिव्य गुण वाली एवं कल्याणमयी माता ने तुम्हें जन्म दिया है. (५)
Fall around like drops of sweat, the glistening armament of Indra. They spread like milk fibers and let the wisdom go away from us. The divinely virtuous and well-being mother has given birth to you. (5)