हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.136.2

मंडल 10 → सूक्त 136 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 136
मुन॑यो॒ वात॑रशनाः पि॒शङ्गा॑ वसते॒ मला॑ । वात॒स्यानु॒ ध्राजिं॑ यन्ति॒ यद्दे॒वासो॒ अवि॑क्षत ॥ (२)
वातरशन के मुनिपुत्र पीले रंग के वल्कल धारण करते हैं. देवों ने देवत्व प्राप्त किया एवं वायु की गति से चलने लगे. (२)
The muni-sons of Vatarshan wear yellow-coloured cover. The gods attained divinity and began to move at the speed of the wind. (2)