हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.14.2

मंडल 10 → सूक्त 14 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 14
य॒मो नो॑ गा॒तुं प्र॑थ॒मो वि॑वेद॒ नैषा गव्यू॑ति॒रप॑भर्त॒वा उ॑ । यत्रा॑ नः॒ पूर्वे॑ पि॒तरः॑ परे॒युरे॒ना ज॑ज्ञा॒नाः प॒थ्या॒३॒॑ अनु॒ स्वाः ॥ (२)
सबके प्रमुख यम हमारे मार्गो को जानते हैं. यम के मार्ग का नाश कोई नहीं कर सकता जिस मार्ग से पूर्ववर्ती पितर गए हैं, उसीसे हम सब लोग जावें. (२)
Everyone's chief Yama knows our ways. No one can destroy the way of Yama, by which the ancestors have gone, by which we all go. (2)