हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.14.4

मंडल 10 → सूक्त 14 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 14
इ॒मं य॑म प्रस्त॒रमा हि सीदाङ्गि॑रोभिः पि॒तृभिः॑ संविदा॒नः । आ त्वा॒ मन्त्राः॑ कविश॒स्ता व॑हन्त्वे॒ना रा॑जन्ह॒विषा॑ मादयस्व ॥ (४)
हे यम! अंगिरा नामक पितरों के साथ एकता रखते हुए तुम इस विस्तृत यज्ञ में आकर बैठी. विद्वान्‌ ऋत्विजों द्वारा बोले हुए मंत्र तुम्हें बुलावें. हे स्वामी यम! तुम इस हवि से प्रसन्न बनो. (४)
Oh, Yum! You came and sat in this elaborate yagna, keeping in unity with the fathers named Angira. Call you the mantras spoken by the learned ritvis. O Lord Yama! Be pleased with this havi. (4)