हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.140.1

मंडल 10 → सूक्त 140 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 140
अग्ने॒ तव॒ श्रवो॒ वयो॒ महि॑ भ्राजन्ते अ॒र्चयो॑ विभावसो । बृह॑द्भानो॒ शव॑सा॒ वाज॑मु॒क्थ्यं१॒॑ दधा॑सि दा॒शुषे॑ कवे ॥ (१)
हे अग्नि! तुम्हारा अन्न प्रशंसनीय है. हे विभावसु! तुम्हारी ज्वाला बहुत दीप्तिशालिनी है. हे विशाल दीप्ति वाले एवं कुशल अग्नि! तुम हव्यदाता को प्रशंसनीय अन्न एवं बल देते हो. (१)
O Agni! Your food is appreciated. O brightness! Your flame is very splendour. O who is of great brilliance and skillful Agni! You give praiseworthy food and strength to the host of yajna. (1)