हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.142.5

मंडल 10 → सूक्त 142 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 142
प्रत्य॑स्य॒ श्रेण॑यो ददृश्र॒ एकं॑ नि॒यानं॑ ब॒हवो॒ रथा॑सः । बा॒हू यद॑ग्ने अनु॒मर्मृ॑जानो॒ न्य॑ङ्ङुत्ता॒नाम॒न्वेषि॒ भूमि॑म् ॥ (५)
अग्नि की अनेक ज्वालाएं दिखाई देती हैं. इनके रथ अनेक हैं, पर सबका गंतव्य एक ही है. हे अग्नि! जब तुम अपनी ज्वालारूपी बाहुओं से वनों को जलाते हो, तब नम्र बनकर ऊंची भूमि पर चढ़ते हो. (५)
Many flames of agni are visible. Their chariots are many, but everyone has the same destination. O agni! When you burn the forests with your flamed arms, you climb the high ground by becoming humble. (5)