हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.142.7

मंडल 10 → सूक्त 142 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 142
अ॒पामि॒दं न्यय॑नं समु॒द्रस्य॑ नि॒वेश॑नम् । अ॒न्यं कृ॑णुष्वे॒तः पन्थां॒ तेन॑ याहि॒ वशा॒ँ अनु॑ ॥ (७)
यह स्थान जल का आधार एवं समुद्र का निवेश है. हे अग्नि! तुम दूसरा स्थान अपनाओ एवं उसी मार्ग से इच्छानुसार जाओ. (७)
This place is the base of water and the investment of the sea. O agni! Take the second place and go the same path as you wish. (7)