हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.143.1

मंडल 10 → सूक्त 143 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 143
त्यं चि॒दत्रि॑मृत॒जुर॒मर्थ॒मश्वं॒ न यात॑वे । क॒क्षीव॑न्तं॒ यदी॒ पुना॒ रथं॒ न कृ॑णु॒थो नव॑म् ॥ (१)
हे अश्चिनीकुमारो! तुमने यज्ञ करके वृद्ध बने अत्रि ऋषि को इतना शक्तिशाली बना दिया था कि वे घोड़े के समान चल सकें. तुमने कक्षीवान्‌ ऋषि को उसी प्रकार युवा बना दिया था, जिस प्रकार बढ़ई पुराने रथ को नया कर देता है. (१)
O aschinikumaro! You made the old sage so powerful that he could walk like a horse by performing yajna. You made the sage Kambivana young in the same way that the carpenter renews the old chariot. (1)