हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.144.6

मंडल 10 → सूक्त 144 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 144
ए॒वा तदिन्द्र॒ इन्दु॑ना दे॒वेषु॑ चिद्धारयाते॒ महि॒ त्यजः॑ । क्रत्वा॒ वयो॒ वि ता॒र्यायुः॑ सुक्रतो॒ क्रत्वा॒यम॒स्मदा सु॒तः ॥ (६)
इंद्र इस सोमरस को पीकर हमारी तथा देवों की विशेष रक्षा करते हैं. हे शोभन कर्म वाले इंद्र! हमें यज्ञ करने के लिए अन्न एवं परम आयु दो. यह सोमरस हमने यज्ञ के लिए निचोड़ा है. (६)
Indra drinks this somras and protects us and the gods specially. O Indra with shobhan karma! Give us food and the ultimate age to perform yajna. This somras we have squeezed for the yagna. (6)