हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.154.2

मंडल 10 → सूक्त 154 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 154
तप॑सा॒ ये अ॑नाधृ॒ष्यास्तप॑सा॒ ये स्व॑र्य॒युः । तपो॒ ये च॑क्रि॒रे मह॒स्ताँश्चि॑दे॒वापि॑ गच्छतात् ॥ (२)
हे प्रे! तुम उन पितरों के समीप जाओ, जो तपस्या करके अपराजेय बने, जो तपस्या से स्वर्ग गए एवं जिन्होंने महान्‌ तप किया. (२)
Hey, Pr! Go to the fathers who became invincible by doing penance, who went to heaven by penance and who did the great penance. (2)