ऋग्वेद (मंडल 10)
मैन॑मग्ने॒ वि द॑हो॒ माभि शो॑चो॒ मास्य॒ त्वचं॑ चिक्षिपो॒ मा शरी॑रम् । य॒दा शृ॒तं कृ॒णवो॑ जातवे॒दोऽथे॑मेनं॒ प्र हि॑णुतात्पि॒तृभ्यः॑ ॥ (१)
हे अग्नि! इस मरे हुए व्यक्ति को पूरी तरह मत जलाओ. इसे कष्ट मत पहुंचाओ. इसके चमड़े और शरीर को इधर-उधर मत बिखेरो. हे जातवेद अग्नि! जब तुम इसे पका चुको, तभी इसे पितरों के पास भेज देना. (१)
O agni! Don't burn this dead person completely. Don't make it painful. Don't scatter its skin and body around. O Jativeda Agni! Send it to the fathers only when you cook it. (1)
ऋग्वेद (मंडल 10)
शृ॒तं य॒दा कर॑सि जातवे॒दोऽथे॑मेनं॒ परि॑ दत्तात्पि॒तृभ्यः॑ । य॒दा गच्छा॒त्यसु॑नीतिमे॒तामथा॑ दे॒वानां॑ वश॒नीर्भ॑वाति ॥ (२)
हे अग्नि! तुम इस मरे हुए शरीर को जब पका लो, तभी इसे पितरों के पास पहुंचा देना. जब यह दोबारा प्राण प्राप्त करेगा, तब देवों के वश में रहेगा. (२)
O agni! When you cook this dead body, deliver it to the fathers. When it attains life again, it will be in the hands of the gods. (2)
ऋग्वेद (मंडल 10)
सूर्यं॒ चक्षु॑र्गच्छतु॒ वात॑मा॒त्मा द्यां च॑ गच्छ पृथि॒वीं च॒ धर्म॑णा । अ॒पो वा॑ गच्छ॒ यदि॒ तत्र॑ ते हि॒तमोष॑धीषु॒ प्रति॑ तिष्ठा॒ शरी॑रैः ॥ (३)
हे मरे हुए व्यक्ति! तुम्हारी आंखें सूर्य को और तुम्हारा प्राण वायु को प्राप्त हो. तुम अपने धार्मिक कार्यो के कारण स्वर्ग या धरती पर जाओ. यदि जल में तुम्हारा सुख है तो वहां जाओ. तुम अपने शरीर के द्वारा ओषधियों में स्थित रहो. (३)
O dead man! May your eyes meet the sun and your soul to the air. You go to heaven or earth because of your religious deeds. If you have happiness in the water, go there. You stay in the herbs through your body. (3)
ऋग्वेद (मंडल 10)
अ॒जो भा॒गस्तप॑सा॒ तं त॑पस्व॒ तं ते॑ शो॒चिस्त॑पतु॒ तं ते॑ अ॒र्चिः । यास्ते॑ शि॒वास्त॒न्वो॑ जातवेद॒स्ताभि॑र्वहैनं सु॒कृता॑मु लो॒कम् ॥ (४)
हे अग्नि! इस मरे हुए व्यक्ति का जो भाग जन्मरहित है, उसीको तुम अपने ताप से तपाओ. तुम्हारी ज्वाला एवं प्रकाश उसे तपावे. हे जातवेद अग्नि! तुम अपने कल्याणकारी रूपों के द्वारा इसे उत्तम कर्म करने वालों के लोकों में ले जाओ. (४)
O agni! Heat the part of this dead person which is without birth with your heat. Let your flame and light heat it. O Jativeda Agni! You take it to the realms of those who do good deeds by your welfare forms. (4)
ऋग्वेद (मंडल 10)
अव॑ सृज॒ पुन॑रग्ने पि॒तृभ्यो॒ यस्त॒ आहु॑त॒श्चर॑ति स्व॒धाभिः॑ । आयु॒र्वसा॑न॒ उप॑ वेतु॒ शेषः॒ सं ग॑च्छतां त॒न्वा॑ जातवेदः ॥ (५)
हे अग्नि! जो मरा हुआ व्यक्ति तुम्हारी आहुति बनकर स्वधा शब्द के साथ ऊपर जाता है, उसे पितरों के समीप जाने की प्रेरणा दो. इसके शरीर का शेष भाग जीवन प्राप्त करे. हे जातवेद अग्नि! यह व्यक्ति शरीर से पुनः मिले. (५)
O agni! The dead person who goes up with the word 'swadha' as your sacrifice, inspire him to go near the fathers. The rest of its body receives life. O Jativeda Agni! This person met the body again. (5)
ऋग्वेद (मंडल 10)
यत्ते॑ कृ॒ष्णः श॑कु॒न आ॑तु॒तोद॑ पिपी॒लः स॒र्प उ॒त वा॒ श्वाप॑दः । अ॒ग्निष्टद्वि॒श्वाद॑ग॒दं कृ॑णोतु॒ सोम॑श्च॒ यो ब्रा॑ह्म॒णाँ आ॑वि॒वेश॑ ॥ (६)
हे मृत व्यक्ति! तुम्हारे जिस अंग को कोवे ने नोचा है अथवा चींटी, सांप या अन्य किसी पशु ने काटा है, अग्नि उस सबको रोगरहित करें. ब्राह्मणों के शरीर में प्रवेश करने वाले सोम भी तुम्हें निरोग बनावे. (६)
O dead person! Let the agni of your organ which has been cut by the cove or cut by the ant, snake or any other animal, make it all disease-free. May the Som who enters the body of the Brahmins also make you healthy. (6)
ऋग्वेद (मंडल 10)
अ॒ग्नेर्वर्म॒ परि॒ गोभि॑र्व्ययस्व॒ सं प्रोर्णु॑ष्व॒ पीव॑सा॒ मेद॑सा च । नेत्त्वा॑ धृ॒ष्णुर्हर॑सा॒ जर्हृ॑षाणो द॒धृग्वि॑ध॒क्ष्यन्प॑र्य॒ङ्खया॑ते ॥ (७)
हे प्रेत! तुम गाय के चमड़े के साथ-साथ आग की लपटरूपी कवच को पहनो. तुम चर्बी और मांस से ढक जाओ. ऐसा होने पर अपने तेज से तुम्हें पराभूत करने वाले एवं अत्यंत प्रसन्न अनने तुम्हें नहीं जलावेंगे. वे तुम्हें विशेष रूप से जलाने को तैयार हैं. (७)
O ghost! You wear cow's leather as well as flame-like armor. You get covered with fat and meat. When this happens, those who defeat you with their glory and are very happy will not burn you. They are especially willing to kindle you. (7)
ऋग्वेद (मंडल 10)
इ॒मम॑ग्ने चम॒सं मा वि जि॑ह्वरः प्रि॒यो दे॒वाना॑मु॒त सो॒म्याना॑म् । ए॒ष यश्च॑म॒सो दे॑व॒पान॒स्तस्मि॑न्दे॒वा अ॒मृता॑ मादयन्ते ॥ (८)
हे अग्नि! इस चमस को इधर-उधर मत करना. यह सोमरस पीने वाले देवों का प्रिय है. यह चमस देवों के सोमपान के लिए है. इसे पाकर मरणरहित देव प्रसन्न होते हैं. (८)
O agni! Don't move this spoon around. This is the beloved of the gods who drink somras. This is for the sompan of the chamas devas. God without death is pleased to find it. (8)