हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.163.3

मंडल 10 → सूक्त 163 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 163
आ॒न्त्रेभ्य॑स्ते॒ गुदा॑भ्यो वनि॒ष्ठोर्हृद॑या॒दधि॑ । यक्ष्मं॒ मत॑स्नाभ्यां य॒क्नः प्ला॒शिभ्यो॒ वि वृ॑हामि ते ॥ (३)
हे रोगी! मैं तुम्हारी आंतों, गुदा, बड़ी आंत, हृदय, गुर्दो, जिगर एवं अन्य अंगों से यक्ष्मा रोग को बाहर निकालता हूं. (३)
Oh patient! I flush out tuberculosis from your intestines, anus, large intestine, heart, kidneys, liver and other organs. (3)