हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.164.4

मंडल 10 → सूक्त 164 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 164
यदि॑न्द्र ब्रह्मणस्पतेऽभिद्रो॒हं चरा॑मसि । प्रचे॑ता न आङ्गिर॒सो द्वि॑ष॒तां पा॒त्वंह॑सः ॥ (४)
हे इंद्र एवं ब्रह्मणस्पति! हमने जो पाप किया है, अंगिरा के पुत्र प्रचेता उस शत्रुरूप पाप से हमें बचावें. (४)
O Indra and Brahmaspati! Let the sin we have committed, the son of Angira, Pracheta, save us from that hostile sin. (4)