हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 165
देवाः॑ क॒पोत॑ इषि॒तो यदि॒च्छन्दू॒तो निरृ॑त्या इ॒दमा॑ज॒गाम॑ । तस्मा॑ अर्चाम कृ॒णवा॑म॒ निष्कृ॑तिं॒ शं नो॑ अस्तु द्वि॒पदे॒ शं चतु॑ष्पदे ॥ (१)
हे देवो! यह कबूतर निर्त्ऋति का दूत है एवं बाधा पहुंचाने की इच्छा से हमारे पास आया है. उसकी पूजा करके हम यह अमंगल दूर करते हैं. हमारे दासदासियों एवं गो, अश्व आदि का कल्याण हो. (१)
Oh, God! This pigeon is the angel of victory and has come to us with the desire to obstruct. By worshipping him we remove this evil. May the welfare of our dasadasis and go, horse etc. (1)

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 165
शि॒वः क॒पोत॑ इषि॒तो नो॑ अस्त्वना॒गा दे॑वाः शकु॒नो गृ॒हेषु॑ । अ॒ग्निर्हि विप्रो॑ जु॒षतां॑ ह॒विर्नः॒ परि॑ हे॒तिः प॒क्षिणी॑ नो वृणक्तु ॥ (२)
हे देवो! हमारे घरों में जो कबूतर भेजा गया है, वह हमारे लिए शुभ हो एवं कोई अमंगल न करे. विद्वान्‌ अग्नि हमारा हव्य ग्रहण करें. यह पंखों वाला आयुध हमें छोड़ जावे. (२)
Oh, God! The pigeon that has been sent to our homes should be auspicious for us and let no one do evil. Let the learned agni accept our heart. Let this winged armament leave us. (2)

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 165
हे॒तिः प॒क्षिणी॒ न द॑भात्य॒स्माना॒ष्ट्र्यां प॒दं कृ॑णुते अग्नि॒धाने॑ । शं नो॒ गोभ्य॑श्च॒ पुरु॑षेभ्यश्चास्तु॒ मा नो॑ हिंसीदि॒ह दे॑वाः क॒पोतः॑ ॥ (३)
यह कपोतरूपिणी पंखों वाली तलवार हमें न मारे. यह विस्तृत अग्निस्थापना वाले स्थान पर बैठे. हमारे मानवों और गायों का कल्याण हो तथा यह कपोतदेव हमारी हिंसा न करें. (३)
Don't let this sword with wings hit us. It sits in a place with wide agni installation. May our human beings and cows be well-being and let this Kapotdev not do our violence. (3)

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 165
यदुलू॑को॒ वद॑ति मो॒घमे॒तद्यत्क॒पोतः॑ प॒दम॒ग्नौ कृ॒णोति॑ । यस्य॑ दू॒तः प्रहि॑त ए॒ष ए॒तत्तस्मै॑ य॒माय॒ नमो॑ अस्तु मृ॒त्यवे॑ ॥ (४)
उल्लू जो कहता है, वह व्यर्थ हो. यह कबूतर अग्ने के स्थान में बैठता है. यह जिसका दूत बनकर आया है, उस मृत्यु देव यम को नमस्कार है. (४)
What the owl says, it should be in vain. It sits in the place of pigeon agne. He is the messenger of whom he has come as a salutation to yama, the god of death. (4)

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 165
ऋ॒चा क॒पोतं॑ नुदत प्र॒णोद॒मिषं॒ मद॑न्तः॒ परि॒ गां न॑यध्वम् । सं॒यो॒पय॑न्तो दुरि॒तानि॒ विश्वा॑ हि॒त्वा न॒ ऊर्जं॒ प्र प॑ता॒त्पति॑ष्ठः ॥ (५)
हे देवो! मंत्रों द्वारा इस भगाने योग्य कबूतर को भगाओ. आनंद के साथ गाय को घास की ओर ले चलो. अत्यंत शीघ्र उड़ने वाला यह कबूतर हमारे सभी पापों को अदृश्य करता हुआ हमारा अन्न छोड़कर उड़ जावे. (५)
Oh, God! Drive out this escapeable pigeon by mantras. Let's take the cow towards the grass with joy. Let this dove, which flies very soon, disappear all our sins and leave our grain and fly away. (5)