हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.166.2

मंडल 10 → सूक्त 166 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 166
अ॒हम॑स्मि सपत्न॒हेन्द्र॑ इ॒वारि॑ष्टो॒ अक्ष॑तः । अ॒धः स॒पत्ना॑ मे प॒दोरि॒मे सर्वे॑ अ॒भिष्ठि॑ताः ॥ (२)
मैं शत्रुओं को नष्ट करने वाला हूं एवं इंद्र के समान अपराजित तथा अहिंसित हूं. ये सभी शत्रु मेरे चरणों में पड़े हुए हैं. (२)
I am going to destroy enemies and i am as undefeated and non-violent as Indra. All these enemies are at my feet. (2)