हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.167.2

मंडल 10 → सूक्त 167 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 167
स्व॒र्जितं॒ महि॑ मन्दा॒नमन्ध॑सो॒ हवा॑महे॒ परि॑ श॒क्रं सु॒ताँ उप॑ । इ॒मं नो॑ य॒ज्ञमि॒ह बो॒ध्या ग॑हि॒ स्पृधो॒ जय॑न्तं म॒घवा॑नमीमहे ॥ (२)
हम स्वर्ग को जीतने वाले व सोमपान से प्रसन्न इंद्र को निचोड़े हुए सोमरस के समीप बुलाते हैं. हे इंद्र! हमारे इस यज्ञ को जानो तथा यहां आओ. हम शत्रुविजयी इंद्र की शरण में आए हैं. (२)
We call Indra, who conquers heaven and is pleased with sompan, near the squeezed somras. O Indra! Get to know this sacrifice of ours and come here. We have come to the refuge of the enemy,the conqueror Indra. (2)