हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.167.4

मंडल 10 → सूक्त 167 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 167
प्रसू॑तो भ॒क्षम॑करं च॒रावपि॒ स्तोमं॑ चे॒मं प्र॑थ॒मः सू॒रिरुन्मृ॑जे । सु॒ते सा॒तेन॒ यद्याग॑मं वां॒ प्रति॑ विश्वामित्रजमदग्नी॒ दमे॑ ॥ (४)
हे इंद्र! मैंने तुमसे प्रेरित होकर यज्ञ में पुरोडाश तैयार किया है. मैं सर्वप्रथम स्तोता के रूप में यह स्तोत्र बोलता हूं. (इंद्र का उत्तर) है विश्वामित्र एवं जमदग्नि! सोमरस तैयार होने पर मैं जिस समय तुम्हारे पास आऊं, उस समय तुम अपने घर में मेरी स्तुति करना. (४)
O Indra! Inspired by you, I have prepared Purodash in the Yagya. I first speak this stotra in the form of a hymn. (Answer of Indra) Vishwamitra and Jamadagni! When I come to you after the somras is ready, at that time you should praise me in your house. (4)