हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.173.6

मंडल 10 → सूक्त 173 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 173
ध्रु॒वं ध्रु॒वेण॑ ह॒विषा॒भि सोमं॑ मृशामसि । अथो॑ त॒ इन्द्रः॒ केव॑ली॒र्विशो॑ बलि॒हृत॑स्करत् ॥ (६)
हे राजन्‌! हम अविनाशी पुरोडाश के साथ स्थिर सोमरस को मिलाते हैं इसलिए इंद्र ने तुम्हारी प्रजाओं को भक्त एवं कर देने वाली बनाया है. (६)
Oh, King! We mix the stable Somras with the indestructible Purodash, so Indra has made your people devotees and tax payers. (6)