ऋग्वेद (मंडल 10)
प्र दे॒वं दे॒व्या धि॒या भर॑ता जा॒तवे॑दसम् । ह॒व्या नो॑ वक्षदानु॒षक् ॥ (२)
हे ऋत्विजो! ज्ञानी अग्नि देव को दिव्य स्तोत्र से प्रसन्न करो. अग्नि विधि के अनुसार हमारा हव्य वहन करें. (२)
Hey Ritvijo! Please the wise agni god with the divine hymn. Carry our havya according to the agni method. (2)