ऋग्वेद (मंडल 10)
बृह॒स्पति॑र्नयतु दु॒र्गहा॑ ति॒रः पुन॑र्नेषद॒घशं॑साय॒ मन्म॑ । क्षि॒पदश॑स्ति॒मप॑ दुर्म॒तिं ह॒न्नथा॑ कर॒द्यज॑मानाय॒ शं योः ॥ (१)
दुर्दशा को नष्ट करने वाले बृहस्पति हमारे पापों को नष्ट करें व हमारा अनर्थ चाहने वाले व्यक्ति के ऊपर आयुध उठावें. वे शत्रु का नाश करें, दुर्बुद्धि का नाश करें एवं यजमान को रोग से बचाकर निर्भय करें. (१)
May Jupiter, who destroys the misery, destroy our sins and raise the yoke on the one who wants our evil. Let them destroy the enemy, destroy the evil sense and save the host from disease and be fearless. (1)
ऋग्वेद (मंडल 10)
नरा॒शंसो॑ नोऽवतु प्रया॒जे शं नो॑ अस्त्वनुया॒जो हवे॑षु । क्षि॒पदश॑स्ति॒मप॑ दुर्म॒तिं ह॒न्नथा॑ कर॒द्यज॑मानाय॒ शं योः ॥ (२)
पांच प्रयाजों में नाराशंस अग्नि हमारी रक्षा करें. आह्वानों में अनुयाज हमारी रक्षा करें. वे श्रु का नाश करें, दुर्बुद्धि को मिटावें एवं यजमान को रोग से बचाकर निर्भय करें. (२)
Fire the narass in five prayas to protect us. Please protect us in the calls. They should destroy the shrew, wipe out the evil sense and protect the host from disease and fear it. (2)
ऋग्वेद (मंडल 10)
तपु॑र्मूर्धा तपतु र॒क्षसो॒ ये ब्र॑ह्म॒द्विषः॒ शर॑वे॒ हन्त॒वा उ॑ । क्षि॒पदश॑स्ति॒मप॑ दुर्म॒तिं ह॒न्नथा॑ कर॒द्यज॑मानाय॒ शं योः ॥ (३)
जो स्तोत्र से द्वेष करने वाले राक्षस हैं, उन्हें हिंसक असुरों के नाश हेतु तप्त शिर वाले बृहस्पति कष्ट दें. वे अमंगल का नाश करें, दुर्बुद्धि को मिटावे एवं यजमान को रोगमुक्त करके निर्भय बनावें. (३)
Those who are demons who hate the hymn, give them the hot-headed Jupiters suffering to destroy the violent asuras. They should destroy the evil, remove the evil, and make the host free of disease and make it fearless. (3)