ऋग्वेद (मंडल 10)
गर्भं॑ धेहि सिनीवालि॒ गर्भं॑ धेहि सरस्वति । गर्भं॑ ते अ॒श्विनौ॑ दे॒वावा ध॑त्तां॒ पुष्क॑रस्रजा ॥ (२)
हे सिनीवाली! तुम गर्भ धारण कराओ. हे सरस्वती! तुम गर्भ की रक्षा करो. हे स्त्री! सुनहरे कमलों की माला पहनने वाले अश्विनीकुमार देव तुम्हारे शरीर में गर्भ धारण करें. (२)
O Sinywali! You conceive. O Saraswati! You protect the womb. O woman! May AshwiniKumar Dev, who wears a garland of golden lotuses, conceive in your body. (2)