हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.187.2

मंडल 10 → सूक्त 187 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 187
यः पर॑स्याः परा॒वत॑स्ति॒रो धन्वा॑ति॒रोच॑ते । स नः॑ पर्ष॒दति॒ द्विषः॑ ॥ (२)
जो अग्नि अत्यंत दूरवर्ती आकाश को पार करके आए हैं, वे हमें शत्रु से बचावें. (२)
Let the agnis that have come across the most distant sky protect us from the enemy. (2)