हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.191.2

मंडल 10 → सूक्त 191 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 191
सं ग॑च्छध्वं॒ सं व॑दध्वं॒ सं वो॒ मनां॑सि जानताम् । दे॒वा भा॒गं यथा॒ पूर्वे॑ संजाना॒ना उ॒पास॑ते ॥ (२)
हे स्तोताओ! तुम लोग आपस में मिलो, एक साथ स्तोत्र बोलो. तुम्हारे मन समान बात को जानें. प्राचीन देव जिस प्रकार सम्मिलित होकर यज्ञ का भाग प्राप्त करते थे, उसी प्रकार तुम भी मिलकर संपत्ति का भोग करो. (२)
O stotao! You people meet each other, speak the stotras together. Know the same thing in your mind. Just as the ancient gods used to join in and receive the part of the yagna, so also you should enjoy the property together. (2)