हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.22.11

मंडल 10 → सूक्त 22 → श्लोक 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 22
म॒क्षू ता त॑ इन्द्र दा॒नाप्न॑स आक्षा॒णे शू॑र वज्रिवः । यद्ध॒ शुष्ण॑स्य द॒म्भयो॑ जा॒तं विश्वं॑ स॒याव॑भिः ॥ (११)
हे शूर एवं वज्रधारी इंद्र! युद्भक्षेत्र में शीघ्र होने वाले तुम्हारे दान की स्तोता स्तुति करते हैं. तुमने मरुतों को साथ लेकर शुष्ण असुर के पूरे वंश का नाश कर डाला. (११)
O Shur and Vajradhari Indra! The hymns praise your soon-to-be-made donation in the battlefield. You took the maruts along with you and destroyed the entire lineage of the Shushna Asura. (11)