हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.22.2

मंडल 10 → सूक्त 22 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 22
इ॒ह श्रु॒त इन्द्रो॑ अ॒स्मे अ॒द्य स्तवे॑ व॒ज्र्यृची॑षमः । मि॒त्रो न यो जने॒ष्वा यश॑श्च॒क्रे असा॒म्या ॥ (२)
इंद्र आज इस यज्ञ में प्रसिद्ध हैं. आज हम वज्रधारी एवं स्तुति के योग्य इंद्र की स्तुतियां करते हैं. इंद्र स्तोताओं को मित्र के समान असाधारण यश देने वाले हैं. (२)
Indra is famous in this yagna today. Today we praise Indra, who is vajradhari and worthy of praise. Indra is going to give the Psalms extraordinary glory like a friend. (2)